ग्राम प्रधानों की शक्तियों पर लगा अंकुश, डीएम की मंजूरी के बिना नहीं शुरू होगा कोई नया विकास कार्य
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ग्राम प्रधानों की शक्तियों पर लगा अंकुश, डीएम की मंजूरी के बिना नहीं शुरू होगा कोई नया विकास कार्य

Curbs placed on the powers of village heads

Curbs placed on the powers of village heads

 बांदा। Curbs placed on the powers of village heads, ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया है। पंचायती राज विभाग के जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रशासक बने ग्राम प्रधान अब बिना डीएम की मंजूरी के कोई नया कार्य नहीं कर सकेंगे और न ही नया फंड खर्च कर सकेंगे।

प्रशासक अपने स्तर से केवल उन्हीं पुराने व पहले से चल रहे विकास कार्यों का भुगतान कर सकेंगे जो पहले से स्वीकृत हैं। नई योजनाओं, खरीद या नए विकास कार्यों को शुरू करने के लिए डीएम से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

ग्राम प्रधानों के लिए नए नियम सिर दर्द बन गए हैं। कार्यकाल बढ़ने पर प्रशासक बनाए जाने से गदगद प्रधानों की नई व्यवस्था ने नींद उड़ा दी है।

जिले में 469 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों का 26 मई को कार्यकाल समाप्त होने के बाद 27 मई से निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाया गया। इसे लेकर प्रधान व उनके प्रतिनिधि उत्साहित थे कि पंचायतों का संचालन पहले की तरह चलता रहेगा। लेकिन पंचायती राज विभाग ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए नया शासनादेश जारी किया है।

आदेश के अनुसार, प्रशासक केवल पहले से स्वीकृत, निर्माणाधीन या पूर्ण हो चुके कार्यों का भुगतान करा सकेंगे। किसी भी नए कार्य को शुरू करने से पहले प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से डीएम के पास भेजना होगा, डीएम की अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही काम शुरू हो सकेगा।

यानी अब गांव में खड़ंजा, नाली, इंटरलाकिंग, हैंडपंप या अन्य विकास कार्यों की शुरुआत प्रधान की मर्जी से नहीं बल्कि डीएम की मंजूरी के बाद ही करवा सकेंगे। इतना ही नहीं, आवश्यकता पड़ने पर प्रस्तावित कार्यों की जांच भी कराई जा सकती है।

नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे प्रशासक

शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासक कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे। यदि कोई विशेष या अत्यावश्यक मामला सामने आता है तो उसका प्रस्ताव डीपीआरओ के माध्यम से डीएम को भेजना अनिवार्य होगा।

दरअसल, यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है, ताकि पंचायत चुनाव से पहले फंड के दुरुपयोग को रोका जा सके और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद खुद को प्रशासक बनाए जाने से उत्साहित प्रधानों के लिए नया आदेश रातों की नींद उड़ा दी है।

शासन के नए आदेश ने साफ कर दिया है कि अब प्रशासक बने प्रधान डीएम की अनुमति के बिना कोई नया विकास कार्य शुरू नहीं करा सकेंगे। यानी गांव की सरकार की चाबी अब सीधे डीएम के हाथ में रहेगी।

प्रधानों को उम्मीद थी कि प्रशासक बनने के बाद भी उनके अधिकार पहले जैसे बने रहेंगे, लेकिन अब उन्हें ज्यादातर कार्यों के लिए प्रशासन की चौखट पर आमद करनी पड़ेगी।

नई योजनाओं, खरीद या नए विकास कार्यों को शुरू करने के लिए डीएम से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। डीएम की संस्तुति पर ही नए कार्य हो सकेंगे।

-राजेंद्र प्रसाद, डीपीआरओ, बांदा